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सृष्टि चक्र मुरली प्वॉइंट्स प्रूफ के साथ
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स्वदर्शन चक्र फिराते रहो। (मु.24.6.85 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
यह 5000 वर्ष का ड्रामा है।... यह बेहद का अनादि बना-बनाया ड्रामा का खेल है। जो रिपीट होता रहता है; इसलिए इसको अनादि अविनाशी वर्ल्‍ड ड्रामा कहा जाता है। (मु.ता.4.6.68 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
इस संगमयुग को पुरुषोत्तम संगमयुग व सर्वश्रेष्ठ युग क्यों कहते हो? क्योंकि आत्मा के हर प्रकार के धर्म की, राज्य की, श्रेष्ठ संस्कारों की, श्रेष्ठ सम्बंधों की और श्रेष्ठ गुणों की सर्वश्रेष्ठता अभी रिकॉर्ड के समान भरता जाता है। 84 जन्मों की चढ़ती कला और उतरती कला, उन दोनों के संस्कार इस समय आत्मा में भरते हो। रिकॉर्ड भरने का समय अभी चल रहा है।... आप बेहद का रिकॉर्ड भरने वाले, सारे कल्प का रिकॉर्ड भरने वाले, क्या हर समय इन सभी बातों के ऊपर अटेंशन देते हो? (अ.वा. 30.5.73 पृ.77 अंत, 78 आदि) मुरली प्रूफ देखें
बाप कहते हैं मैं आता हूँ 40/50 वर्ष। (मु.9.4.73 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
संगमयुग कोई बड़ा नहीं है, 50 वर्ष का है। (मु.20.2.73 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
थोड़ा समय 50/60 वर्ष लगते हैं पूरी राजधानी स्थापना में।(मु. 24.7.72 पृ.2 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
अभी है संगमयुग। इसको 100 वर्ष देने चाहिए। (मु. 5.11.71 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
बच्चे जानते हैं पुरुषोत्तम संगमयुग की आयु बहुत थोड़ी है। 40 वर्ष से अभी बाकी 8 वर्ष रही है।... तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना है। 32 वर्ष तो चला गया। यह पुरुषोत्तम संगमयुग सबसे हीरे जैसा है। मोस्ट वैल्युएबल है। (मु.ता.18.9.68 पृ.1 आ.) मुरली प्रूफ देखें
ब्रह्मा की आयु मृत्युलोक में खत्म होगी। (मु.ता.16.10.84 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
आप सोचते होंगे कि लोग पूछेंगे कि आपका ब्रह्मा 100 वर्ष से पहले ही चला गया? यह तो बहुत सहज प्रश्‍न है कोई मुश्किल नहीं। 100 वर्ष के नज़दीक ही तो आयु थी। यह जो 100 वर्ष कहे हुए हैं यह गलत नहीं है। अगर कुछ रहा हुआ है तो आकार द्वारा पूरा करेंगे। 100 वर्ष ब्रह्मा की स्थापना का पार्ट है। वह तो 100 वर्ष पूरा होना ही है। (अ.वा. 21.1.69 पृ.21 मध्य) ता.21.1.69पृ.21 की अ.वा.मध्य मुरली प्रूफ देखें
कराची से लेकर मुरली निकलती आई है। (मु.ता.26.5.78 पृ.1 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
एक ही सितारा है जो अपनी जगह बदली नहीं करता। क्या ऐसे सितारे हो? वह है दृढ़ संकल्प वाला सितारा, जिसको अपनी इस दुनिया में ध्रुव सितारा कहा जाता है। (अ.वा.20.5.74 पृ.44 अंत) मुरली प्रूफ देखें
संगमयुग कोई बड़ा नहीं है, 50 वर्ष का है। (मु.20.2.73 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
इतना 50 वर्ष कोई भी यज्ञ नहीं चलता।... तुम्हारा यह यज्ञ 50 वर्ष चलता है। (मु.11.5.73 पृ.2 म.) मुरली प्रूफ देखें
50 वर्ष नहीं तो करके 100 वर्ष लगते हैं। उत्थ(ल)-पाथल पूरी हो फिर राज्य शुरू हो जाते हैं। (मु.25.9.71 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
अभी है संगमयुग। इसको 100 वर्ष देना चाहिए। (मु.ता.3.11.76 पृ.3 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
तमोप्रधान से सतोप्रधान बनने में 40-50 वर्ष लगते हैं। (मु.ता.6.10.74 पृ.2. अंत) मुरली प्रूफ देखें
थोड़ा समय 50/60 वर्ष लगते हैं पूरी राजधानी स्थापना में। (मु.ता.24.7.72 पृ.2 आ) मुरली प्रूफ देखें
अमेरिका के अख़बार में भी पड़़ गया कि एक कलकत्ते का जवाहरी कहता है मुझे 16,108 रानियाँ चाहिए, अभी 400 मिली हैं। (मु.31.8.78 पृ.3 आ.) मुरली प्रूफ देखें
हंगामा जब होगा तो साकार शरीर द्वारा तो कुछ कर न सकेंगे और प्रभाव भी इस सर्विस से (मनसा सेवा से) पड़ेगा। जैसे शुरू में भी साक्षात्कार से ही प्रभाव हुआ ना, परोक्ष-अपरोक्ष अनुभव ने प्रभाव डाला, वैसे अंत में भी यही सर्विस होनी है। (अ.वा.24.1.72 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
बहुत हैं जो टूट जावेंगे। थोड़ी आफतें आने दो, फिर देखना कैसे भागते हैं! तुम भागे हो ज्ञान के पिछाड़ी। ज्ञान न होता तो भागते थोड़े ही। तुम इनके पिछाड़ी थोड़े ही भागते हो। इसने जादू आदि कुछ नहीं किया। जादूगर शिवबाबा को कहते हैं। (मु.5.11.76 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
हमने कोई को भगाया क्या? किसको भी कहा नहीं कि तुम भागकर आओ। हम तो वहाँ थे। यह आपे ही भाग आईं।... कोई मनुष्य यह सब थोड़े ही कर सकता। सो भी ब्रिटिश गवर्मेंट के राज्य में। कोई के पास में इतनी कन्यायें-मातायें बैठ जायें। कोई कुछ कर न सके। कोई सम्बंधी आते थे तो एकदम भगा देते थे। बाबा तो कहते थे भल इनको समझाओ, ले जाओ। मैं कोई मना थोड़े ही करता हूँ; परंतु किसकी हिम्मत नहीं होती थी। बाप की ताकत थी ना। नथिंग न्यू। यह फिर भी सब होगा। (मु.22.4.75 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
कोई को देखते ही नहीं थे तो फिर दिल किससे लगावेंगे? (सिवाय सत् बाप के)। (मु.ता.8.7.74 पृ.2 म.) मुरली प्रूफ देखें
जैसे स्थापना के आरम्भ में आसक्ति है वा नहीं, उसकी ट्रायल के लिए बीच-2 में जानबूझकर प्रोग्राम रखते रहे। जैसे, 15 दिन सिर्फ ढोढ़ा और छाछ खिलाई, गेहूँ होते भी यह ट्रायल कराई गई। कैसे भी बीमार 15 दिन इसी भोजन पर चले। कोई भी बीमार नहीं हुआ। दमा की तक़लीफ़ वाले भी ठीक हो गये ना। (अ.वा.25.10.87 पृ.103 अंत) मुरली प्रूफ देखें
ऐसे नहीं कि तन-मन-धन दे दिए हैं तो कोई भूख मरते हैं। नहीं। शिवबाबा का भण्डारा है, जिससे सभी का शरीर निर्वाह होता है, होता रहेगा। भल कहानियाँ हैं द्रौपदी के डेंगरे की खुर-2 हुई, फिर भी विजय तो हुई ना। अभी प्रैक्टिकल में पार्ट चल रहा है। शिवबाबा का भण्डारा सदैव भरपूर है। वह भी एक परीक्षा थी, जिनको डर हुआ तो समझा जाकर अपने माँ-बाप पास सुखी हो जावें तो चले गए। बाकी साथ देने वाले चले आये हैं । भूख मरने की तो बात ही नहीं। (मु.ता.6.3.77 पृ.2 मध्‍यांत) मुरली प्रूफ देखें
जब पहले-पहले मित्र-संबंधियों के पास गये तो क्या पेपर था, वह शरीर को न देखें लाइट देखें। बेटी न देखे; लेकिन देवी देखें। यह पेपर दिया ना! अगर संबंध के रूप से देखा, बेटी-बेटी कहा तो फेल। तो ऐसा अभ्यास चाहिए। (अ.वा.10.11.83 पृ.16) मुरली प्रूफ देखें
गो सून, कम सून। (मु.ता.29.9.63 पृ.9 आ.) मुरली प्रूफ देखें
हर एक मनुष्य मात्र को, हर चीज़ को सतो, रजो, तमो में आना होता है। नई से पुरानी ज़रूर होती है। कपड़ा भी नया पहनते हैं फिर पुराना होता तो कहेंगे न- पहले सतोप्रधान, फिर ज़रूर सतो, रजो, तमो तुमको ज्ञान मिला है। (मु.13.6.76 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
हर चीज़ पहले सतोप्रधान, फिर सतो, रजो, तमो होती है। (मु.ता. 5.9.85 पृ.2 म.) मुरली प्रूफ देखें
मेले-मलाखड़े सब दुर्गति में ले जाने वाले हैं। बाप तो बच्चों को समझावेंगे ना। (मु.25.11.72 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
उन मेलों पर तो मनुष्य मैले जाकर होते हैं। पैसे बरबाद करते रहते हैं। मिलता तो कुछ भी नहीं। (मु.ता. 14.5.70 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
सतयुग अंत में वृद्धि होकर 9 लाख से 2 करोड़ हो गए होंगे। (मु.ता.22.3.76 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
एक भी पावरफुल संगठन होने से एक-दूसरे को खींचते हुए 108 की माला का संगठन एक हो जावेगा। एक-मत का धागा हो और संस्कारों की समीपता हो तब ही माला भी शोभेगी। दाना अलग होगा या धागा अलग-अलग होगा तो माला शोभेगी नहीं। (अ.वा.9.12.75 पृ.272 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
इस एक्स्ट्रा समय का भी रहस्य है। पीछे आने वाले उलाहना न दें कि हमें बहुत थोड़ा समय मिला। जैसे सौदे के पीछे एक्स्ट्रा रूंग(घात) दी जाती है- वैसे ड्रामा अनुसार यह समय भी सेवा के प्रति अमानत रूप में मिला हुआ है। (मु.ता. 16.1.79) मुरली प्रूफ देखें
मुरलियाँ तो बहुत सुनी हैं। कुछ रहा है सुनने का? अभी तो मिलना और मनाना है। सुनना और सुनाना भी बहुत हो गया। साकार रूप में सुनाया, अव्यक्त रूप में भी कितना सुनाया, एक वर्ष नहीं; लेकिन 13 वर्ष। अभी तेरहवें में तेरा ही होना चाहिए ना। तेरा हूँ इसी धुन में रहो तो सारा सुनाने का सार आ जावेगा। (अ.वा.21.3.81 पृ.80 म.) मुरली प्रूफ देखें
पंजाब की धरनी कन्या दान में श्रेष्ठ निकली अर्थात् महादानी निकली। (अ.वा.19.12.78 पृ.137 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
84 का साल आ रहा है। 84 घण्टे वाली शक्ति मशहूर है। (अ.वा.10.11.83 पृ.11 आदि) मुरली प्रूफ देखें
गाया हुआ है, सच की नाव हिलेगी; लेकिन डूबेगी नहीं। (मु.14.6.85 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
याद रखो, सच्चे बाप को अपने जीवन की नैया दे दी, तो सत्य के साथ की नाव हिलेगी; लेकिन डूब नहीं सकती। (अ.वा.3.5.77 पृ.119 आदि) मुरली प्रूफ देखें
कृष्ण जन्मता है जैसे रोशनी हो जाती है। (मु.ता.10.11.76 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
सारी उथल-पुथल हो नई दुनिया बन जावेगी। जैसे बाबा इनमें आकर बैठते हैं वैसे आत्मा बिगर कोई तकलीफ गर्भ महल में आकर बैठती है। जैसे कृष्ण को पिपर(पीपल) के पत्ते पर दिखाते हैं ना। अभी कोई समुद्र में पिपर(पीपल) के पत्ते पर ऐसा कोई होता नहीं है। यहाँ दिखाया है कैसे आराम से रहते हैं। फिर जब समय होता है तो बाहर आ जाते हैं तो जैसे बिजली चमक जाती है; क्योंकि आत्मा सतोप्रधान चकमक बन गई ना। (मु.10.10.68 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
शास्त्रों में फिर युगे-2 कह दिया है, एक-2 युग के बाद अवतार लेते हैं। बाप समझाते हैं मैं युगे-2 नहीं आता हूँ; परंतु पुरुषोत्तम कल्प के संगमयुगे आता हूँ। (मु.14.9.74 पृ.1 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
बापदादा ने भी समाचार सुना, अफ्रीका के उमंग-उत्‍साह की मुबारक हो। पहला नंबर शुरू किया है, उसकी मुबारक। ऐसे सभी को नंबरवार करना है; लेकिन पहले पान का बीड़ा उठाया है, अच्‍छा है। प्‍लैन भी अच्‍छा है। वहाँ के हैण्ड्स निकालके वहाँ सेवा कराना, यह प्‍लैन बहुत अच्‍छा है; क्‍योंकि और कहाँ से हैण्ड्स कम ही मिलते हैं और वहाँ से वहाँ के अनुभवी होते हैं।--- यह प्‍लैन सबसे अच्‍छा लगा और सहज विधि हो गई ना। हैण्ड्स भी मिलेंगे और सेवा भी बढ़ गई। (अ.वा.15.10.04 पृ.6) मुरली प्रूफ देखें
नव युग रचता बापदादा ने आप सबको गोल्डन वर्ल्‍ड की सौगात दी है, जो अनेक जन्म चलने वाली है। विनाशी सौगात नहीं है। अविनाशी सौगात बाप ने आप बच्चों को दे दी है। याद है ना! भूल तो नहीं गये हो ना! सेकण्ड में आ-जा सकते हो। (अ.वा.31.12.04 पृ.50 आदि) मुरली प्रूफ देखें
सिर्फ़ 2 नंबर आउट हुए हैं, बाप और माँ। अभी कोई भी भाई-बहन का तीसरा नंबर आउट नहीं हुआ है। (अ.वा. 31.10.2006 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
में तो बापदादा ने बता दिया था कि ‘सीट फिक्स कोई नहीं हुई है। सिवाय ब्रह्मा बाप और जगदम्बा के। और सब सीट खाली हैं।’ (अ.वाणी 25.11.95 पृ.40 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
— विनाश का समय कभी भी फिक्स नहीं होना है, अचानक होना है। बापदादा ने पहले से ही इशारा दे दिया है। उस समय नहीं उलाहना देना कि बाबा, थोड़ा इशारा तो देते। अचानक होना है, एवररेडी रहना है। (अ.वा.ता. 3.4.97 पृ.57 म.) मुरली प्रूफ देखें
कई समझते हैं यह तो सिर्फ़ कहते रहते हैं- मौत आया कि आया। होता तो कुछ नहीं। इस पर एक मिसाल भी है ना- उसने कहा शेर है, शेर; परन्तु शेर आया नहीं। आखिर एक दिन शेर आ गया, बकरी सब खा गया। यह बातें सब यहाँ की हैं। एक दिन काल खा जायेगा। (मु.ता. 18.12.83 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
जब तक सूर्यवंशी राजधानी तुम्हारी स्थापन न हुई है तब तक विनाश नहीं हो सकता। (मु.10.1.73 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
आगे चल दुनिया की हालत बिल्कुल खराब होनी है। खाने (के) लिए अनाज नहीं मिलेगा तो घास खाने लगेंगे। फिर ऐसे थोड़े ही कहेंगे, माखन बिगर हम रह नहीं सकते। (मु.5.3.76 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
बरसात आदि भी, नैचुरल कैलेमिटीज़ भी होंगी। यह सब अचानक होता रहेगा।... धरती भी ज़ोर से हिलती है। तूफान, बरसात आदि सब होता है। बॉम्ब्स भी फेंकते हैं; परंतु यहाँ एडीशन है सिविल वार। (मु.2.8.85 पृ.3 म.) मुरली प्रूफ देखें
जो ज्ञान नहीं लेते, उनका विनाश हो जाता है। भक्तिमार्ग का विनाश, ज्ञानमार्ग वालों की स्थापना हो जाती है। वह सज़ायें भी खाते हैं। पद भी नहीं पाते। (मु.27.11.77 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
विनाश तो होगा। सभी ख़त्म हो जावेंगे। बाकी कौन बचेंगे? जो श्रीमत पर पवित्र रहते हैं वही बाप की मत पर चल विश्व की बादशाही का वर्सा पाते हैं। (मु.6.9.76 पृ.1 अंत, 2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
विनाश होने बाद थोड़े बचते हैं। उनमें पुण्यात्मा भी रहते हैं। फिर हिसाब-किताब चुक्तू कर सतयुग में तो सब पावन होंगे। संगम पर कुछ पतित कुछ पावन रहते हैं, फिर पतित खलास हो फिर पावन ही पावन रहेंगे। (मु.7.6.64 पृ.4 आदि) मुरली प्रूफ देखें
सद्गुरु के निंदक ठौर ना पाए। (मु.ता.2.2.68 पृ.1 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
ब्रह्मा का दिन और ब्रह्मा की रात- दोनों इक्वल होता है ना! फिर सतयुग दिन की इतनी बड़ी आयु और रात को छोटा क्यों कर दिया है? ब्रह्मा का दिन और ब्रह्मा की रात, दोनों इक्वल होनी चाहिए ना। (मु.22.9.77 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
ब्रह्मा की रात सो सरस्वती की रात, ब्रह्मावंशियों की भी रात। दिन में फिर सभी ब्राह्मण सो देवता बनते हैं। (मु.27.7.73पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
बरोबर परमपिता परमात्मा ब्रह्मा की रात को ब्रह्मा का दिन बनाने आता है। (मु.20.10.73 पृ.1 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
— चारों प्रकार का निश्चय अर्थात् बाप में, आप में, ड्रामा में और ब्राह्मण परिवार में निश्चय। ये चार ही तरफ के निश्चय को जानना नहीं; लेकिन मानकर चलना। अगर जानते हैं; लेकिन चलते नहीं हैं तो विजय डगमग होती है। (अ.वा. 9/1/95) मुरली प्रूफ देखें
में बोला कि ‘याद की यात्रा से और सृष्टि की आदि मध्‍य अंत को जानने से हम चक्रवर्ती राजा बन जावेंगे। (मु. 7.8.67) मुरली प्रूफ देखें
ड्रामा के एक्टर्स होते हुए भी ड्रामा के मुख्य एक्टर्स, डायरैक्टर, क्रियेटर और ड्रामा के आदि, मध्य, अंत को नहीं जानते हैं तो वह बेसमझ हैं। इसे लिखने में भी कोई हर्जा नहीं है। (मु.14.8.76 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
दुर्गति से निकाल सदगति बाप ही देते हैं। वही क्रियेटर ,डायरैक्टर ,मुख्य एक्टर गाया जाता है। मुख्य एक्टर कैसे है? पतित-पावन बाप आकर पतित दुनिया में सभी को पावन बनाते हैं। तो मुख्य हुआ ना। (मु.17.6.72 पृ.2अंत) मुरली प्रूफ देखें
जब पूरा दुर्गति को पाने का पूरा ग्रहण लगे तब बाप फिर 16 कला सम्पूर्ण बनाने आते हैं। ग्रहण को स्वदर्शनचक्र से निकाला जाता है। (मु.27.11.77 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
स्थापना का कार्य सम्पन्न होना अर्थात् विनाशकारियों को ऑर्डर मिलना है। जैसे समय समीप अर्थात् पूरा होने पर सुई आती है और घंटे स्वतः ही बजते हैं, ऐसे बेहद की घड़ी में स्थापना की सम्पन्नता अर्थात् समय पर सुई (कांटा) का आना और विनाश के घंटे बजना। तो बताओ, सम्पन्नता में एवररेडी हो? (अ.वा.1.1.79 पृ.164 आदि) मुरली प्रूफ देखें
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