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Advance Course in Hindi

Murli Point

  • पहले मुख्य बात है-मात-पिता की पहचान देनी है। ....मुख्य बात है मात-पिता का परिचय दिया। अब समझा है तो लिखो, नहीं तो गोया कुछ नहीं समझा। हड्डी (दिल से) समझाकर फिर लिखवाना चाहिए।बरोबर यह जगतअम्बा, जगतपिता है।वह लिख दे बरोबर बाप से वर्सा मिलता है।......एक ही त्रिमूर्ति चित्र पर पूरा समझाना है। निश्चय करते हो यह तुम्हारा माँ-बाप है। इससे वर्सा मिलना है। (मु.12.3.87 पृ.2 मध्यांत)
  • पहले-2 तो त्रिमूर्ति पर ही समझाना है।....पहले-2 तो परिचय देना है बाप का। (मु.5.11.71 पृ.1 अंत)

Murli Point

  • स्वदर्शन चक्र फिराते रहेंगे तो बहुत धन मिलेगा। भगवानुवाच मुझे याद करो और स्वदर्शन चक्र फिराओ अर्थात् ड्रामा के आदि-मध्य-अंत को जानो। मेरे द्वारा मुझे भी जानो और सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का चक्र भी जानो दो बात मुख्य हैं। इस पर अटेन्शन देना है (मु.6.11.88 पृ.1मध्यांत)

Murli Point

  • लक्ष्मी-नारायण का चित्र बहुत अच्छा है। इनमें सारा सेट है। त्रिमूर्ति भी, लक्ष्मी-नारायण भी, राधे-कृष्ण भी हैं। यह चित्र भी कोई रोज़ देखता रहे तो याद रहे शिवबाबा ब्रह्मा द्वारा हमको यह बना रहे हैं। (मु.7.8.65 पृ.2 अंत )
  • अपना एम आब्जेक्ट देखने से ही रिफ्रेशमेंट आ जाती है, इसलिए बाबा कहते हैं कि यह लक्ष्मी-नारायण का चित्र हरेक के पास होना चाहिए।........यह चित्र दिल में प्यार बढ़ाता है। (मु.11.1.66 पृ.3 आदि)
  • सभी के घर में यह ल.ना. का चित्र ज़रुर होना चाहिए। कितना एक्युरेट चित्र है। इनको याद करेंगे तो बाबा याद आवेगा।बाबा को याद करो तो यह याद आवेगा। (मु.1.1.69 पृ.3 आदि)
  • बाबा कहते हैं जब भी फुसर्त मिले तो ल.ना. के चित्र सामने आकर बैठो। रात को भी यहाँ आकर सो सकते हो। इन ल.ना. को देखते-2 सो जाओ। (मु.20.1.74 पृ.2 अंत)

Murli Point

  • ज्ञान में तो सिर्फ बीज को जानना होता है। बीज के ज्ञान से सारा झाड़ (बुद्धि में) आ जाता है। (मु.29.9.77 पृ.2 मध्यांत)
  • बाप कल्प-2 आकर, कल्प वृक्ष की नॉलेज देते है। क्योंकि खुद बीज रूप । सत है चैतन्य है इसलिए कल्प वृक्ष का सारा राज़ समझाते है। (मु.17.11.68 पृ.2 मध्य)

Murli Point

  • बाबा की बुद्धि में तो यह सीढ़ी का चित्र बहुत रहता है।......बच्चे जो विचार-सागर-मंथन कर ऐसे-2 चित्र बनाते हैं, तो बाबा भी उनको शुक्रिया करते हैं या तो ऐसे कहेंगे कि बाबा ने उस बच्चे को टच किया है। (मु.29.2.76 पृ.2 अन्त 3 आदि)
  • सीढ़ी का चित्र तुम्हारे लिए बहुत अच्छा है समझाने का,जिन्न की भी कहानी बताते हैं। यह सभी दृष्टांत आदि इस समय के ही हैं। तुम्हारे ऊपर ही बने हुए हैं। (मु.18.11.70 पृ.2 अन्त)
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